Sep 04, 2026

उत्तराखंड: 4,000 सार्वजनिक उपक्रमों का ब्योरा होगा सार्वजनिक, 17 बिंदुओं पर देनी होगी हर छोटी-बड़ी जानकारी

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देहरादून। उत्तराखंड में प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के करीब चार हजार सार्वजनिक उपक्रमों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को अब अपनी प्रमुख और गोपनीय समझी जाने वाली जानकारियां आम जनता के सामने सार्वजनिक करनी होंगी।

प्रदेश में करीब चार हजार सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थाओं के कामकाज को अब जनता के लिए अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थाओं को अपनी प्रमुख जानकारियां जनता के सामने सार्वजनिक करनी होंगी। इसके लिए सभी संबंधित संस्थाओं को 17 बिंदुओं में मैनुअल तैयार कर अपनी वेबसाइट और बोर्ड नोटिस के माध्यम से उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत संस्था के गठन का उद्देश्य, कर्मचारियों की संख्या, उन्हें मिलने वाले मासिक वेतन और संस्था की जिम्मेदारियों समेत महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक होंगी। सार्वजनिक उपक्रमों की परिभाषा के दायरे में आने वाली संस्थाओं को अपने स्तर पर यह मैनुअल जारी करना होगा। इसका उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, ताकि आम लोगों को संबंधित संस्था की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों की जानकारी आसानी से मिल सके। 17 बिंदुओं के मैनुअल में संस्था में कार्यरत स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों की संख्या का विवरण देना होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को मिलने वाले मासिक वेतन की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी। संस्था किस उद्देश्य और किस सेवा के लिए स्थापित की गई है, इसका ब्योरा भी मैनुअल में शामिल करना होगा। यह जानकारी केवल वेबसाइट तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित संस्थाओं को इसे अपने बोर्ड नोटिस के माध्यम से भी सार्वजनिक करना होगा, ताकि ऐसे लोग भी जानकारी हासिल कर सकें जो ऑनलाइन माध्यम का उपयोग नहीं करते हैं। सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थाओं के लिए मैनुअल में दी गई जानकारियों को नियमित रूप से अपडेट करना भी अनिवार्य होगा। यानी एक बार जानकारी सार्वजनिक करने के बाद संस्थाएं उसे स्थायी दस्तावेज मानकर नहीं छोड़ सकेंगी। परिस्थितियों, कर्मचारियों की संख्या, जिम्मेदारियों अथवा अन्य संबंधित जानकारियों में बदलाव होने पर मैनुअल को अपडेट करना होगा। व्यवस्था की निगरानी और अनुपालन की स्थिति जांचने के लिए राज्य की दो निजी संस्थाओं को ऑडिट की जिम्मेदारी दी गई है। ये संस्थाएं सार्वजनिक उपक्रमों का निरीक्षण कर यह देखेंगी कि निर्धारित 17 बिंदुओं के अनुसार मैनुअल तैयार किया गया है या नहीं और उसे निर्धारित माध्यमों से सार्वजनिक किया गया है या नहीं। ऑडिट करने वाली संस्थाओं को सभी सार्वजनिक उपक्रमों की मैनुअल की हार्ड या सॉफ्ट कॉपी सहित ऑडिट रिपोर्ट 15 फरवरी 2027 तक उत्तराखंड सूचना आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। यदि कोई संस्था निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप जानकारी सार्वजनिक करने में विफल रहती है तो उसके शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर आयोग ऐसे मामलों की रिपोर्ट संबंधित उच्च संस्थाओं को भी भेज सकता है। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी के अनुसार, इस व्यवस्था का मकसद विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। कई बार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से न समझने अथवा जवाबदेही से बचने के कारण जनता से जुड़े कार्यों में टालमटोल करते हैं। इसका नुकसान आम लोगों के साथ राज्य को भी होता है। उनके मुताबिक मैनुअल सार्वजनिक होने से लोगों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि संबंधित विभाग या संस्था किस उद्देश्य से गठित है, उसकी जिम्मेदारियां क्या हैं और वहां कितने कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ लोगों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। व्यवस्था लागू होने के बाद सार्वजनिक उपक्रमों की जवाबदेही केवल विभागीय स्तर तक सीमित न रहकर जनता के सामने भी अधिक स्पष्ट होगी।