77वां गणतंत्र दिवस देश भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। हरिद्वार में योग गुरु स्वामी रामदेव ने भी पतंजलि योगपीठ में झंडा फहराकर देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। स्वामी रामदेव ने देश को समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सभी देशवासियों से एकजुट होकर परिश्रम करने का आह्वान किया। मीडिया से बात करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि डॉलर और यूरो की बादशाहत खत्म करने के लिए 140 करोड़ देशवासियों को स्वदेशी का रास्ता चुनना चाहिए। अगर देशवासी एकजुट होंगे तो वो दिन दूर नहीं जब एक 1 रुपया 100 डॉलर के बराबर होगा। साथ ही स्वामी रामदेव ने कहा कि दुनिया में कहीं टैरिफ टेररिज्म चल रहा है, कहीं सत्ता का उन्माद, कहीं संपत्ति तो कहीं मजहबी उन्माद चल रहा है। भारत में तो सनातन में ही कुछ लोग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। कुछ लोग गाय माता, गंगा और पालकी के नाम पर ही उन्माद फैला रहे हैं।
अमेरिका टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा है। दुनिया बहुत खतरनाक दौर से गुजर रही है. इसलिए इस दौर में श्रेष्ठ भारत बनाने के लिए स्वदेशी शिक्षा, चिकित्सा और सनातन पद्धति पर चलना होगा। हमें भारत को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्ति के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक शक्ति के रूप में विकसित करना होगा। उन्होंने देशवासियों से गणतंत्र दिवस पर मैकाले की शिक्षा और एमएनसीज कंपनियों के बहिष्कार का प्राण लेने की बात कही। उन्होंने बताया कि आज डॉलर और पौंड के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। आज कुछ देशों को छोड़कर कोई बड़ा देश हमें बिना वीजा के घुसने तक नहीं देता। दुश्मन देशों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए साधु संतों से लेकर आमजन में कोई असमानता न हो, सब एकजुट होकर देश को मजबूत बनाएं। स्वामी रामदेव ने राजनीतिक दलों को भी एकजुट होने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि चुनाव हारते ही ईवीएम को दोष देना उचित नहीं है। चाहे शंकराचार्य हो या राजनीतिक दल सबको एकजुट रहना चाहिए। देश में विपक्ष को भी मजबूत होना चाहिए। रामदेव ने सभी शंकराचार्यों को प्रणाम करते हुए कहा कि गौमाता को वो राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना चाहते हैं। गौमाता राष्ट्रमाता नहीं बल्कि विश्वमाता का दर्जा मिलना चाहिए। लेकिन ये कैसे होगा, सबको सोचना चाहिए। इसके लिए गाय से जुड़े उत्पादों का उपयोग करना होगा। गोचर भूमि पर अवैध कब्जे हटाने होंगे। स्वामी रामदेव ने पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी को भारत पद्मश्री सम्मान मिलने के सवाल पर सभी पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान पाने वालों को शुभकामनाएं दी और कहा कि देश में साधु संतों और संन्यासियों को भी भारत रत्न मिलना चाहिए। इसकी शुरुआत स्वामी विवेकानंद, दयानंद और किसी शंकराचार्य से करनी चाहिए।