Jan 27, 2026

बीकेटीसी बोर्ड बैठक में मंदिर प्रवेश नियमों पर लग सकती है मुहर

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उत्तराखंड में मौजूद पौराणिक धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग लगातार तेज होती जा रही है। जहां एक ओर हरिद्वार के हरकी पैड़ी समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदू के प्रवेश पर रोक की मांग लंबे समय से हो रही है। तो दूसरी ओर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने भी अपने अधीन सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने का निर्णय लिया है।  इसके लिए बीकेटीसी आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करने जा रहा है वहीं, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान आया है। 

उत्तराखंड में हजारों की संख्या में पौराणिक मंदिर मौजूद हैं। यही वजह है कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है।  ऐसे में अब उत्तराखंड राज्य में मौजूद धार्मिक और पौराणिक मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने की मांग तेज होती जा रही है। शुरुआती दौर में हरिद्वार के हरकी पैड़ी में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने को लेकर गंगा सभा ने मांग उठाई है। इसके लिए गंगा सभा ने हरिद्वार नगर निगम के साल 1916 के बायलॉज का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया है कि ये बायलॉज ब्रिटिश काल से चला आ रहा है।  ऐसे में गंगा सभा के साथ ही तमाम हिंदूवादी संगठन और लोग हरिद्वार के हरकी पैड़ी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठा रहे हैं। हरिद्वार के हरकी पैड़ी में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की उठी मांग अब धीरे-धीरे प्रदेश भर में मौजूद तमाम धार्मिक और पौराणिक स्थलों के लिए भी उठने लगी है। गंगा सभा के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष ने भी इस बात पर जोर दिया है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ ही बीकेटीसी के अधीन आने वाले करीब 52 मंदिरों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी।  इसके लिए जल्द ही होने वाले बीकेटीसी के बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव लाया जाएगा। इस प्रस्ताव के जरिए बीकेटीसी के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित कर दिया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, सरकार का एक स्पष्ट मत है. प्रदेश के जितने भी धार्मिक स्थल, पौराणिक स्थल और देवस्थान है, इन स्थानों को देखने वाले और उनका संचालन करने वाले सभी धार्मिक संगठनों के लोग, तीर्थ सभा, गंगा सभा, केदार सभा और बदरी-केदार मंदिर समिति के लोग, पूज्य संत समाज हैं। ये सभी लोग ही धार्मिक स्थलों का संचालन करते है। ऐसे में इन सभी की जो राय और मत होगा, उसी के अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी।  ये स्थान बहुत पौराणिक महत्व के स्थान हैं। ऐसे में इन स्थानों पर पहले समय में जो कुछ कानून बने हुए हैं, उसका सरकार अध्ययन कर रही है। ऐसे में उन्हीं कानूनों के आधार पर सरकार आगे बढ़ेगी।