Mar 01, 2026

उत्तराखंड में आपदा रिस्पांस टाइम कम करने की योजना: तीन दिनों तक चलेगा राहत और बचाव का सघन अभ्यास

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देहरादून। राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 16, 17 और 18 मार्च को सभी 13 जिलों में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। यह अभ्यास केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहकर विभिन्न तहसीलों में भी कराया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर आपदा से निपटने की वास्तविक क्षमता का आकलन किया जा सके और स्थानीय प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाया जा सके।

मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के अधिकारियों ने अपने-अपने चयनित संभावित स्थलों और तैयारियों की जानकारी दी। सचिव सुमन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल को वास्तविक परिस्थितियों की तरह आयोजित किया जाए, जिससे अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों की सही पहचान हो सके और भविष्य के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके।सचिव सुमन ने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) अब स्वयं इस प्रकार के अभ्यासों को सफलतापूर्वक संचालित करने में सक्षम हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब जिलों को भी इस स्तर तक प्रशिक्षित और संसाधनयुक्त बनाया जा रहा है कि वे अपने स्तर पर नियमित मॉक ड्रिल आयोजित कर सकें। यूएसडीएमए ‘जीरो डेथ’ के लक्ष्य को सामने रखकर कार्य कर रहा है, ताकि आपदाओं के दौरान जनहानि को न्यूनतम किया जा सके। मॉक अभ्यास के दौरान विभिन्न संभावित आपदाओं पर आधारित परिदृश्यों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें भूकंप, वनाग्नि, भूस्खलन, अग्निकांड, जलभराव, बाढ़, मानव-वन्यजीव संघर्ष, नाव पलटना, बादल फटना, जलाशय विस्फोट, औद्योगिक दुर्घटना, एवलांच, भगदड़ और नदी में डूबने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन परिदृश्यों के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों की गति, समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। इस अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, वन विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से भाग लेंगी। उद्देश्य यह है कि आपदा की स्थिति में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और प्रतिक्रिया समय को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस तरह के नियमित अभ्यास से न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों की तत्परता बढ़ेगी, बल्कि आमजन में भी आपदा के प्रति जागरूकता और सतर्कता का स्तर ऊंचा होगा। तीन दिवसीय इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल से आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक स्थिति का व्यापक मूल्यांकन संभव हो सकेगा।