Aug 10, 2026

झारखंड में गूंजा आदिवासी अस्मिता का संदेश, जल-जंगल-जमीन से लेकर रोजगार तक पर मंथन

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रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को झारखंड के विभिन्न जिलों में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और योगदान को याद करते हुए भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए। देवघर से लेकर पाकुड़, बोकारो, गढ़वा, लातेहार और जामताड़ा तक आयोजित कार्यक्रमों में आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण, शिक्षा, रोजगार और युवाओं के कौशल विकास पर जोर दिया गया। जगह-जगह वीर आदिवासी नायकों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जबकि पारंपरिक नृत्य, लोककला, खानपान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोहों में रंग भर दिया।

संथाल परगना के देवघर में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, एसपी प्रवीण पुष्कर, उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा समेत जिले के अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि न्यायाधीश कौशल किशोर झा ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस झारखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संथाल परगना में आदिवासी समाज की बड़ी आबादी है और झारखंड की पहचान बनाने में इस समाज की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भारत की मूल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेड़, पहाड़, नदी और जंगल को संस्कृति और आस्था से जोड़कर प्रकृति संरक्षण की परंपरा आदिवासी समाज में सदियों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के योगदान के बिना झारखंड की कल्पना अधूरी है। बोकारो के कैंप टू स्थित शिबू सोरेन स्मृति भवन में बोकारो आदिवासी महोत्सव-2026 आयोजित हुआ। इसका उद्घाटन पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक और बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने किया। समारोह में पारंपरिक हस्तशिल्प, जनजातीय लोकचित्रकला और खानपान की प्रदर्शनी लगाई गई। मंदार और नगाड़े की थाप पर पारंपरिक लोकनृत्य, आदिवासी परिधान फैशन शो और आदिवासी विचार-दर्शन पर परिचर्चा भी हुई। कार्यक्रम में अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत और सम्मान किया गया। गढ़वा में अधिकारियों ने बिरसा मुंडा पार्क पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद महात्मा गांधी और वीर शहीद नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। टाउन हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ रक्तदान शिविर आयोजित हुआ, जिसमें पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। लातेहार के पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी युवाओं के कौशल विकास और स्थानीय संसाधनों से रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया। पलामू टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रजेश जेन ने बताया कि ‘हुनर से रोजगार’ पहल के तहत अब तक 600 से अधिक जनजातीय युवाओं को नेचुरलिस्ट, कंप्यूटर, ड्राइविंग, इलेक्ट्रिशियन और सिलाई समेत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि ‘मिशन अविरल धारा’ के तहत रिज-टू-वैली मॉडल से स्थानीय नदियों और जलधाराओं को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। जल संरक्षण के इन प्रयासों को स्थानीय लोगों के लिए ग्रीन जॉब्स से भी जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जामताड़ा के दुलाडीह स्थित नगर भवन में जिला प्रशासन की ओर से मुख्य समारोह आयोजित किया गया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की पहचान और उत्थान के लिए काम कर रही है। मंत्री ने केंद्र सरकार से धर्म कोड लागू करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को मजबूत करने के लिए इस दिशा में निर्णय जरूरी है। विश्व आदिवासी दिवस के आयोजनों ने झारखंड में यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज की पहचान केवल उसकी परंपराओं तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति, प्रकृति संरक्षण, सामाजिक संरचना और विकास यात्रा से गहराई से जुड़ी है। समारोहों में जल-जंगल-जमीन के संरक्षण के साथ युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की दिशा में भी प्रयास तेज करने की जरूरत पर जोर दिया गया।