Jun 03, 2026

शासन और यूपीसीएल के बीच विरोधाभास खत्म करने की कोशिश: प्रतिनियुक्ति नीति में बड़ा बदलाव

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देहरादून। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने और आंतरिक अनुशासन को मजबूत करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अभियंताओं (इंजीनियर्स) और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे यूपीसीएल प्रबंधन ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के बाहरी विभागों में प्रतिनियुक्ति पर जाने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। इस संबंध में यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) की हरी झंडी के बाद अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) द्वारा एक कड़ा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इस फैसले के बाद से बिजली महकमे में हड़कंप मच गया है।

यूपीसीएल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और व्यवस्था को आधुनिक बनाने के कारण निगम के कार्यों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। राज्य में सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, राजस्व वसूली बढ़ाने, लाइन लॉस (बिजली चोरी व तकनीकी नुकसान) को कम करने जैसे नियमित कार्यों के अलावा कई महात्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें पूरे प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग लागू करना, देहरादून सहित प्रमुख शहरों में अंडरग्राउंड केबलिंग का काम और स्काडा जैसी आधुनिक तकनीक को धरातल पर उतारना शामिल है। इन बड़े प्रोजेक्ट्स के विपरीत, निगम में स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में बेहद कम कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। स्टाफ की इस भारी कमी के कारण राज्य की बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं में देरी या व्यवधान आने का खतरा लगातार बना हुआ है। कर्मचारियों के टोटे की एक बड़ी वजह विभिन्न न्यायालयों में वरिष्ठता (सीनियरिटी) से जुड़े मामलों का लंबित होना भी है, जिसके कारण पदोन्नति (प्रमोशन) के सैकड़ों पद खाली चल रहे हैं। इस संकट से उबरने के लिए यूपीसीएल प्रबंधन नए पदों को भरने के लिए शासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया में जुटा है। लेकिन, शासन के साथ हुई बैठकों में यूपीसीएल को उस वक्त भारी असहजता का सामना करना पड़ा, जब शासन के उच्च अधिकारियों ने एक बड़ा विरोधाभास सामने रख दिया। शासन का तर्क था कि एक तरफ तो यूपीसीएल अपने मौजूदा अनुभवी कर्मचारियों को बाहरी विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेज रहा है और दूसरी तरफ मैनपावर की कमी का रोना रोकर नए पदों की मांग कर रहा है। शासन की इस तीखी टिप्पणी और काम के दबाव को देखते हुए ही प्रबंधन ने प्रतिनियुक्ति के सभी द्वारों को बंद करने का अंतिम निर्णय लिया। निगम के संज्ञान में आया है कि कई अभियंता और बाबू बिना विभागीय अनुमति या 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' के ही सीधे बाहरी विभागों में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर रहे थे और गुपचुप तरीके से साक्षात्कारों (इंटरव्यू) में भी शामिल हो रहे थे। प्रबंधन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना है। नए आदेश में दो टूक साफ किया गया है। कोई भी अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारी का प्रतिनियुक्ति आवेदन (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) उच्च अधिकारियों को फॉरवर्ड नहीं करेगा। कोई भी कर्मचारी बाहरी विभागों के विज्ञापनों पर सीधे आवेदन या अग्रिम प्रति (एडवांस कॉपी) प्रेषित नहीं करेगा। बिना अनुमति के किसी भी बाहरी विभाग के साक्षात्कार में जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन निर्देशों का किसी भी स्तर पर उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ निगम आचरण नियमावली के तहत तत्काल सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।